AI Summit में ‘टॉपलेस’ तकरार! BJP का ‘गद्दार’ वार, Congress का पलटवार

शकील सैफी
शकील सैफी

दिल्ली की ठंडी हवा में इन दिनों बहस की भाप उठ रही है। कहानी शुरू हुई भारत मंडपम में चल रहे AI Impact Summit से, और पहुँच गई सड़कों पर नारेबाज़ी तक। यूथ कांग्रेस के ‘टॉपलेस’ प्रदर्शन ने ऐसा डिजिटल तूफान खड़ा किया कि राजनीतिक पार्टियों के वॉर रूम में अलार्म बजने लगे।

जहाँ सरकार इसे भारत की टेक्नोलॉजिकल शान का शोकेस बता रही है, वहीं विपक्ष का दावा है कि असली मुद्दा डेटा और पॉलिसी ट्रांसपेरेंसी है। लेकिन सियासत में इरादों से ज्यादा तस्वीरें वायरल होती हैं, और इस बार तस्वीरें ही आग का ईंधन बन गईं।

मनोज तिवारी का ‘गद्दार’ वाला वार

सुबह होते ही बीजेपी युवा मोर्चा कांग्रेस मुख्यालय की ओर कूच कर गया। प्रदर्शन की अगुवाई दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा कर रहे थे, लेकिन सुर्खियाँ बटोरीं सांसद मनोज तिवारी ने। उन्होंने सीधे राहुल गांधी पर हमला बोलते हुए ‘देश का गद्दार’ तक कह डाला।

बीजेपी का आरोप साफ है, जब दुनिया के सामने भारत AI की ताकत दिखा रहा था, तब कांग्रेस ने देश की छवि धूमिल करने की कोशिश की। बयानबाज़ी इतनी तेज थी कि पुलिस को मोर्चा संभालना पड़ा और कई नेताओं को हिरासत में लेना पड़ा। सियासत का तापमान थर्मामीटर से नहीं, ट्विटर से मापा जाने लगा।

कांग्रेस का पलटवार: ‘कॉम्प्रोमाइज्ड’ सरकार?

बीजेपी के हमले के बाद कांग्रेस भी पीछे नहीं रही। पार्टी ने पीएम नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए ‘कॉम्प्रोमाइज्ड’ शब्द का इस्तेमाल किया। कांग्रेस का कहना है कि जब सत्ता सवालों से कतराती है, तब युवा सड़क पर उतरते हैं।

कांग्रेस का नैरेटिव यह है कि यह विरोध देश के हितों की रक्षा के लिए था, न कि अपमान के लिए। पार्टी ने अपने आधिकारिक हैंडल से लगातार वीडियो और बयान जारी कर यह संदेश देने की कोशिश की कि “इंडिया का युवा चुप नहीं रहेगा।”

AI Summit या Political Wrestling Arena?

AI समिट में वैश्विक विशेषज्ञों की मौजूदगी को बीजेपी ‘विश्व गुरु’ की दिशा में कदम बता रही है। दूसरी तरफ कांग्रेस इसे डेटा सुरक्षा और पारदर्शिता से जोड़कर सवाल उठा रही है। असली बहस AI पर होनी थी, लेकिन फिलहाल बहस ‘टी-शर्ट’ और ‘ट्वीट’ पर अटकी हुई है।

दिल्ली पुलिस ने इलाके में धारा 163 लागू कर दी है और सुरक्षा बढ़ा दी गई है। मगर सोशल मीडिया पर यह जंग बिना ब्रेक के चल रही है। राजनीति कभी-कभी शतरंज लगती है, पर इस बार बोर्ड पर मोहरे नहीं, माइक्रोफोन भिड़ रहे हैं।

साख की लड़ाई या Narrative की जंग?

यह टकराव सिर्फ एक प्रदर्शन या बयान तक सीमित नहीं है। यह उस Narrative War का हिस्सा है जिसमें टेक्नोलॉजी, राष्ट्रवाद और युवा राजनीति तीनों घुल-मिल गए हैं। AI का मंच अचानक Ideology का अखाड़ा बन गया है।

दिल्ली की सर्दी चाहे कुछ भी कहे, सियासत की धूप अभी तेज रहने वाली है। सवाल यह है कि आने वाले दिनों में बहस AI पर लौटेगी या आरोप-प्रत्यारोप की रील ही चलती रहेगी।

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